गुरुवार, 8 नवंबर 2012

बात बोलने और बेचने की

सेल्स, मार्केटिंग और प्रमोशनल प्रोफेशन से जूड़े ज्यादातर लोगों में ज्यादा बोलने की बीमारी लग जाती है। इन लोगों को ये भ्रम होता है कि ज्यादा बोलने से ही ज्यादा बिकता है।
लेकिन सही मायने में काबिल वो लोग होते हैं जो कम से कम बोल कर ज्यादा से ज्यादा बेच देते हैं और ऐसे ही लोग इस क्षेत्र में बुलंदियों पर पहुचते हैं ।

रविवार, 15 जनवरी 2012

बात बड़े होने की

वास्तव में इंसान तब बड़ा बनता हैं जब वो छोटी-छोटी बातों को भी समझने लगता है और छोटे से छोटे लोगों कि भी कद्र करना शुरू कर देता है।

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

बात इम्प्रेशन की

जो लोग हर जगह सिर्फ अपना इम्प्रेशन बनाने में लगे रहते हैं, उनका इम्प्रेशन बन तो जाता है लेकिन हमेशा बना नही हर पाता है ।
मेहनत बेहतर इम्प्रेशन बनाने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर कि जाए तो इम्प्रेशन बन भी जाता है और बना भी रहता है ।

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

बात वादे की

क्रोध में खाई हुई कसम और भावुकता में किया गया वादा ज्यादा दिनों तक निभती नही हैं । या तो ये टूट जाते हैं या फिर निभाने वाला ।

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

बात जिगर की

कुत्ता और शेर में फर्क ये है कि कुत्ता जगह से शेर होता है जबकि शेर जिगर से शेर होता है। जगह चाहे कौन सी भी हो शेर हर वक्त शेर ही रहता है ।
दम जगह में नही जिगर मे होना चहिए।

हमारा भी जिगर ऐसा होना चहिए कि हम सिर्फ वक्त की महरबानी से ही पहलवानी न करते रहें । बुरे वक्त में भीगी बिल्ली बन जाने के बजाय शेर की तरह ही उसका मुकाबला करें ।

बात खुशी की

अगर हम हर पल हर परिस्थिति में अपने अंदर की खुशी को बनाए रखने की कोशिश में लगे रहें तो लाइफ खुद-व-खुद बनती चली जाती है । पल जैसा भी हो, परिस्थिति चाहे जैसी भी हो अगर हम अंदर की खुशी नही खोते तो हम बहुत कुछ खोने से बच जाते हैं ।

यहाँ बात अंदर की खुशी की हो रही है जो न तो बाहर की चीजों और नही इस बात पर पे निर्भर करती है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं या आपके साथ क्या कहते हैं बल्कि अंदर की खुशी सिर्फ और सिर्फ इस पे निर्भर है कि आप क्या सोचते हैं और आप क्या करते हैं ।

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

बात जिन्दगी की

देती लबोँ को हँसी तो कभी पलकेँ नम कर जाती है जिन्दगी।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।

कुछ ख्वाब पूरे कर हमारा हौसला बढ़ाती है,
कुछ सपने तोड़ कर हमें कुछ सिखलाती है,

हमें कुछ न कुछ हरपल हरदम दे जाती है जिन्दगी।

देती लबोँ को हँसी तो कभी पलकेँ नम कर जाती है जिन्दगी ।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।