क्रोध में खाई हुई कसम और भावुकता में किया गया वादा ज्यादा दिनों तक निभती नही हैं । या तो ये टूट जाते हैं या फिर निभाने वाला ।
कुछ छोटी-छोटी बातें जो अपने आसपास घट रही घटनाओं से सिखाने को मिलती हैं. ये बातें बड़ी काम की हो सकती हैं अगर इनपर सोच-विचार और अमल किया जाये.
शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011
गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011
बात जिगर की
कुत्ता और शेर में फर्क ये है कि कुत्ता जगह से शेर होता है जबकि शेर जिगर से शेर होता है। जगह चाहे कौन सी भी हो शेर हर वक्त शेर ही रहता है ।
दम जगह में नही जिगर मे होना चहिए।
हमारा भी जिगर ऐसा होना चहिए कि हम सिर्फ वक्त की महरबानी से ही पहलवानी न करते रहें । बुरे वक्त में भीगी बिल्ली बन जाने के बजाय शेर की तरह ही उसका मुकाबला करें ।
दम जगह में नही जिगर मे होना चहिए।
हमारा भी जिगर ऐसा होना चहिए कि हम सिर्फ वक्त की महरबानी से ही पहलवानी न करते रहें । बुरे वक्त में भीगी बिल्ली बन जाने के बजाय शेर की तरह ही उसका मुकाबला करें ।
बात खुशी की
अगर हम हर पल हर परिस्थिति में अपने अंदर की खुशी को बनाए रखने की कोशिश में लगे रहें तो लाइफ खुद-व-खुद बनती चली जाती है । पल जैसा भी हो, परिस्थिति चाहे जैसी भी हो अगर हम अंदर की खुशी नही खोते तो हम बहुत कुछ खोने से बच जाते हैं ।
यहाँ बात अंदर की खुशी की हो रही है जो न तो बाहर की चीजों और नही इस बात पर पे निर्भर करती है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं या आपके साथ क्या कहते हैं बल्कि अंदर की खुशी सिर्फ और सिर्फ इस पे निर्भर है कि आप क्या सोचते हैं और आप क्या करते हैं ।
यहाँ बात अंदर की खुशी की हो रही है जो न तो बाहर की चीजों और नही इस बात पर पे निर्भर करती है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं या आपके साथ क्या कहते हैं बल्कि अंदर की खुशी सिर्फ और सिर्फ इस पे निर्भर है कि आप क्या सोचते हैं और आप क्या करते हैं ।
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
बात जिन्दगी की
देती लबोँ को हँसी तो कभी पलकेँ नम कर जाती है जिन्दगी।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।
कुछ ख्वाब पूरे कर हमारा हौसला बढ़ाती है,
कुछ सपने तोड़ कर हमें कुछ सिखलाती है,
हमें कुछ न कुछ हरपल हरदम दे जाती है जिन्दगी।
देती लबोँ को हँसी तो कभी पलकेँ नम कर जाती है जिन्दगी ।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।
कुछ ख्वाब पूरे कर हमारा हौसला बढ़ाती है,
कुछ सपने तोड़ कर हमें कुछ सिखलाती है,
हमें कुछ न कुछ हरपल हरदम दे जाती है जिन्दगी।
देती लबोँ को हँसी तो कभी पलकेँ नम कर जाती है जिन्दगी ।
देती है खुशी तो कभी गम दे जाती है जिन्दगी ।
रविवार, 13 फ़रवरी 2011
बात वक्त की
हम जिसे 'बुरा वक्त' कहते हैं वो वास्तव में 'बदलाव का वक्त' होता है जो हमें बदलने के लिए आता है । पर जब हम खुद को तो बदलते नही उलटा वक्त के बदलने का इंतजार मे करने लगते हैं तो वक्त वास्तव में बुरा होता जाता है।
बदल नही रहा अगर वक्त आपका
तो आप ही बदल जाएँ ।
लोग सम्भलतेँ हैं ठोकरोँ के बाद
आप पहले ही सम्भल जाएँ ॥
बदल नही रहा अगर वक्त आपका
तो आप ही बदल जाएँ ।
लोग सम्भलतेँ हैं ठोकरोँ के बाद
आप पहले ही सम्भल जाएँ ॥
शनिवार, 12 फ़रवरी 2011
बात जागने की
रात को जल्दी सोयेँ ताकि जिन्दगी का सवेरा देर तक कायम रहे ।
सुबह जल्दी जागेँ ताकि जिन्दगी की शाम देर से आए ।
अभी थोड़ा दौड़ लिया करें ताकि बुढापे में चल सकें ।
अभी थोड़ी कसरत कर लें ताकि आगे कवायत कम करनी पड़े ।
सुबह जल्दी जागेँ ताकि जिन्दगी की शाम देर से आए ।
अभी थोड़ा दौड़ लिया करें ताकि बुढापे में चल सकें ।
अभी थोड़ी कसरत कर लें ताकि आगे कवायत कम करनी पड़े ।
बात उम्मीद की
खुद से की गई उम्मीद हमेशा सफलता की वजह बनती है और दूसरों से की गई उम्मीद अकसर दुख का कारण ।
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