गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

बात जिगर की

कुत्ता और शेर में फर्क ये है कि कुत्ता जगह से शेर होता है जबकि शेर जिगर से शेर होता है। जगह चाहे कौन सी भी हो शेर हर वक्त शेर ही रहता है ।
दम जगह में नही जिगर मे होना चहिए।

हमारा भी जिगर ऐसा होना चहिए कि हम सिर्फ वक्त की महरबानी से ही पहलवानी न करते रहें । बुरे वक्त में भीगी बिल्ली बन जाने के बजाय शेर की तरह ही उसका मुकाबला करें ।

बात खुशी की

अगर हम हर पल हर परिस्थिति में अपने अंदर की खुशी को बनाए रखने की कोशिश में लगे रहें तो लाइफ खुद-व-खुद बनती चली जाती है । पल जैसा भी हो, परिस्थिति चाहे जैसी भी हो अगर हम अंदर की खुशी नही खोते तो हम बहुत कुछ खोने से बच जाते हैं ।

यहाँ बात अंदर की खुशी की हो रही है जो न तो बाहर की चीजों और नही इस बात पर पे निर्भर करती है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं या आपके साथ क्या कहते हैं बल्कि अंदर की खुशी सिर्फ और सिर्फ इस पे निर्भर है कि आप क्या सोचते हैं और आप क्या करते हैं ।