जिन्दगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब इन्सान समझ नहीं पता कि उसने सही किया या गलत, इन्सान जो कुछ भी करता है या तो वो दिमाग कि मानता है या फिर दिल की, जब वो दिल की मानता है तो दिमाग कहता है गलत जब वो दिमाग की करता है तो दिल कहता है गलत और ऐसा इसलिए होता है कि इन्सान के दिल और दिमाग एक दुसरे के विपरीत होता है।
दिल जानता है - प्यार, करूणा, दया, और ऐसी ही बहुत सी भावनाएं लेकिन दिमाग जानता है - बुद्धिमानी, चालाकी, चापलूसी, सही और गलत दिल होता सरल और दिमाग होता है जटिल |
दिल और दिमाग के बिच तारत्म्य बिठा के चलना ही जिंदगी है।
दिल और दिमाग के बिच तारत्म्य बिठा के चलना ही जिंदगी है।