किसी भी चीज को लेकर हमसब की सोच-समझ और नजरिये में कुछ न कुछ भिन्नताएँ होती है. हमसब को अपने से अलग सोच रखने वाले लोगों का नजरिया जरुर जानना और समझना चाहिए इस से हमारे खुद के नजरिये में व्यापकता आती है.
कुछ छोटी-छोटी बातें जो अपने आसपास घट रही घटनाओं से सिखाने को मिलती हैं. ये बातें बड़ी काम की हो सकती हैं अगर इनपर सोच-विचार और अमल किया जाये.
शनिवार, 2 मार्च 2013
शनिवार, 5 जनवरी 2013
बात दिल और दिमाग की
जिन्दगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब इन्सान समझ नहीं पता कि उसने सही किया या गलत, इन्सान जो कुछ भी करता है या तो वो दिमाग कि मानता है या फिर दिल की, जब वो दिल की मानता है तो दिमाग कहता है गलत जब वो दिमाग की करता है तो दिल कहता है गलत और ऐसा इसलिए होता है कि इन्सान के दिल और दिमाग एक दुसरे के विपरीत होता है।
दिल जानता है - प्यार, करूणा, दया, और ऐसी ही बहुत सी भावनाएं लेकिन दिमाग जानता है - बुद्धिमानी, चालाकी, चापलूसी, सही और गलत दिल होता सरल और दिमाग होता है जटिल |
दिल और दिमाग के बिच तारत्म्य बिठा के चलना ही जिंदगी है।
दिल और दिमाग के बिच तारत्म्य बिठा के चलना ही जिंदगी है।
शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012
बात ईमानदारी की
ईमानदार होने का भ्रम लगभग सभी को होता और कुछ लोग इसका दावा भी करते रहते हैं, लेकिन अपने छोटे-छोटे स्वार्थ सिद्धि के लिए अपनी ईमानदारी से समझौता कर लेते हैं। सही मायने में ईमानदार वो होते हैं जो किसी भी कीमत पर अपनी ईमानदारी से समझौता नहीं करते बल्कि ईमानदारी के लिए बाकि सभी चीजों से समझौता कर लेते हैं.
शुक्रवार, 9 नवंबर 2012
बात फिल्म और जिंदगी की
फिल्म को दर्शक बेहतर ढंग से देख और समझ सकें इसलिए शूटिंग के समय कैमरे को कभी ऊँचाइयों पे रखा जाता है तो कभी ज़मीन पर, कभी गतिमान तो कभी स्थिर। उसी प्रकार, हमारी जिंदगी में उतार-चढ़ाव और ठहराव इस लिए आते हैं कि हम जिंदगी को अच्छी तरह से समझ सकें।
गुरुवार, 8 नवंबर 2012
बात स्वास्थ्य और स्वभाव की
स्वास्थ्य का बहुत गहरा सम्बन्ध हमारे स्वभाव से होता है। अगर स्वस्थ रहना चाहते हैं तो मस्त रहिये! जितने मस्त रहिये उतने जिम्मेवार भी। जिम्मेवारियों को मस्ती के साथ पूरा करने से सफलता के साथ-साथ लोकप्रियता भी मिलती है। और जिम्मेवारियों को और टेंशन के साथ पूरा करने से बेचैनी, झुन्झलाहट और थकान के साथ कभी-कभी असफलता भी हाथ आती है, जिसका सीधा असर हमारे सेहत पर पड़ता है।
बात बोलने और बेचने की
सेल्स, मार्केटिंग और प्रमोशनल प्रोफेशन से जूड़े
ज्यादातर लोगों में ज्यादा बोलने की बीमारी लग जाती है। इन लोगों को ये
भ्रम होता है कि ज्यादा बोलने से ही ज्यादा बिकता है।
लेकिन सही मायने में काबिल वो लोग होते हैं जो कम से कम बोल कर ज्यादा से ज्यादा बेच देते हैं और ऐसे ही लोग इस क्षेत्र में बुलंदियों पर पहुचते हैं ।
लेकिन सही मायने में काबिल वो लोग होते हैं जो कम से कम बोल कर ज्यादा से ज्यादा बेच देते हैं और ऐसे ही लोग इस क्षेत्र में बुलंदियों पर पहुचते हैं ।
रविवार, 15 जनवरी 2012
बात बड़े होने की
वास्तव में इंसान तब बड़ा बनता हैं जब वो छोटी-छोटी बातों को भी समझने लगता है और छोटे से छोटे लोगों कि भी कद्र करना शुरू कर देता है।
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