शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

बात फिल्म और जिंदगी की

फिल्म को दर्शक बेहतर ढंग से देख और समझ सकें इसलिए शूटिंग के समय कैमरे को कभी ऊँचाइयों पे रखा जाता है तो कभी ज़मीन पर, कभी गतिमान तो कभी स्थिर। उसी प्रकार, हमारी जिंदगी में उतार-चढ़ाव और ठहराव इस लिए आते हैं कि हम जिंदगी को अच्छी तरह से समझ सकें।

गुरुवार, 8 नवंबर 2012

बात स्वास्थ्य और स्वभाव की

स्वास्थ्य का बहुत गहरा सम्बन्ध हमारे स्वभाव से होता है। अगर स्वस्थ रहना चाहते हैं तो मस्त रहिये! जितने मस्त रहिये उतने जिम्मेवार भी। जिम्मेवारियों को मस्ती के साथ पूरा करने से सफलता के साथ-साथ लोकप्रियता भी मिलती है। और जिम्मेवारियों को और टेंशन के साथ पूरा करने से बेचैनी, झुन्झलाहट और थकान के साथ कभी-कभी असफलता भी हाथ आती है, जिसका सीधा असर हमारे सेहत  पर पड़ता है।

बात बोलने और बेचने की

सेल्स, मार्केटिंग और प्रमोशनल प्रोफेशन से जूड़े ज्यादातर लोगों में ज्यादा बोलने की बीमारी लग जाती है। इन लोगों को ये भ्रम होता है कि ज्यादा बोलने से ही ज्यादा बिकता है।
लेकिन सही मायने में काबिल वो लोग होते हैं जो कम से कम बोल कर ज्यादा से ज्यादा बेच देते हैं और ऐसे ही लोग इस क्षेत्र में बुलंदियों पर पहुचते हैं ।

रविवार, 15 जनवरी 2012

बात बड़े होने की

वास्तव में इंसान तब बड़ा बनता हैं जब वो छोटी-छोटी बातों को भी समझने लगता है और छोटे से छोटे लोगों कि भी कद्र करना शुरू कर देता है।

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

बात इम्प्रेशन की

जो लोग हर जगह सिर्फ अपना इम्प्रेशन बनाने में लगे रहते हैं, उनका इम्प्रेशन बन तो जाता है लेकिन हमेशा बना नही हर पाता है ।
मेहनत बेहतर इम्प्रेशन बनाने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर कि जाए तो इम्प्रेशन बन भी जाता है और बना भी रहता है ।

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

बात वादे की

क्रोध में खाई हुई कसम और भावुकता में किया गया वादा ज्यादा दिनों तक निभती नही हैं । या तो ये टूट जाते हैं या फिर निभाने वाला ।

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

बात जिगर की

कुत्ता और शेर में फर्क ये है कि कुत्ता जगह से शेर होता है जबकि शेर जिगर से शेर होता है। जगह चाहे कौन सी भी हो शेर हर वक्त शेर ही रहता है ।
दम जगह में नही जिगर मे होना चहिए।

हमारा भी जिगर ऐसा होना चहिए कि हम सिर्फ वक्त की महरबानी से ही पहलवानी न करते रहें । बुरे वक्त में भीगी बिल्ली बन जाने के बजाय शेर की तरह ही उसका मुकाबला करें ।